‘घर में संस्कार नहीं होंगे, तो होगा मतांतरण’, गोरखपुर में कुटुंब स्नेह मिलन कार्यक्रम में बोले संघ प्रमुख मोहन भागवत

‘घर में संस्कार नहीं होंगे, तो होगा मतांतरण’, गोरखपुर में कुटुंब स्नेह मिलन कार्यक्रम में बोले संघ प्रमुख मोहन भागवत

Rss Chief Mohan Bhagwat

Rss Chief Mohan Bhagwat

गोरखपुर: Rss Chief Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गोरखपुर विभाग की ओर से सोमवार को संघ शताब्दी वर्ष के तहत कुटुंब स्नेह मिलन कार्यक्रम का आयोजन हुआ. तारामंडल स्थित बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित इस कार्यक्रम में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत (RSS Chief Mohan Bhagwat) ने कहा कि यदि कुटुम्ब का साथ न मिलता तो 'संघ' न बनता. कुटुम्ब का साथ मिलता है तो कोई भी समाज बड़ा होता है. संघ को जानना है तो संघ की शाखा देखिए संघ का स्वयंसेवक देखिए. संघ के स्वयंसेवक का कुटुम्ब देखिए. हम जो करते हैं, उसे आचरण में लाते हैं. समाज को बदलना है तो कुटुम्ब में परिवर्तन लाना होगा. हमारा परिवार व्रतस्थ होना चाहिए. रोटी, कपड़ा, मकान, स्वास्थ्य शिक्षा और अतिथि-सत्कार, ये कुटुम्ब की आवश्यक आवश्यकताएं हैं. यह होना चाहिए. छोटे स्तर पर 'कुटुम्ब मिलन' कार्यक्रम करें.

समाज तब बदलता है आचरण...- संघ प्रमुख ने कहा कि समाज अपना आचरण तब बदलता है जब गृहस्थ के कार्य को देखता है. संघ के स्वयंसेवक को समाज से अवश्य पांच कदम आगे होना चाहिए. 'पंच परिवर्तन' भाषण में नहीं रहना है, उसे स्वयं आचरण में लाना है.सभी विषमताओं से ऊपर उठना होगा. इस मिलन कार्यक्रम में गोरखपुर महानगर के 20 नगरों,चौरी-चौरा,गोरखपुर ग्रामीण के जिला स्तरीय कार्यकर्ता, नगर- जिला- विभाग- प्रांत कार्यकारिणी,प्रवासी कार्यकर्ता और उनके परिवार के सदस्य सम्मिलित हुए.

ऐसे नहीं बनता कुटुंब: उन्होंने कहा कि एक छत एक चारदीवारी में एक पुरुष महिला से कुटुंब नहीं बनता. कुटुंब में एक रिश्ता होता है जिसमें अपनापन होता है. शिशु के जन्म के कुछ क्षण बाद अपनेपन से धीरे धीरे परिवार के सदस्यों से रिश्ता बन जाता है. अगली पीढ़ी सामाजिक बने इसके लिए कुटुंब एक इकाई है. समाज में कैसे रहना है इसका प्रशिक्षण परिवार में होता है. भारत में अपनेपन से बना कुटुंब भारत में ही है. हमारे बच्चों को अपना कुटुंब मिलता है, जबकि विदेशों में ऐसा नहीं है.

कुटुंब का केंद्र माता हैं: उन्होंने कहा कि मैं अकेला नहीं हूं, बल्कि हम सब हैं. अतः केवल अपनी आवश्यकताओ का विचार नहीं करूंगा, यह कुटुंब में सिखाया जाता है. समाजिक शिक्षा,आर्थिक गतिविधियो का केंद्र, संस्कृति पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानांतरण का केंद्र कुटुंब ही है. कुटुंब का केंद्र माता है. हम भारत माता के पुत्र है. उन्होंने कहा कि 'पर्यावरण' की चिन्ता हमें अपने घर से करना है, जो हम कर सकते हैं. अलग से कुछ नहीं करना. हमारे आदर्शो के चित्र जरूर हमारे घरों में होना चाहिए. जहाँ तक सम्भव हो स्वदेशी का प्रयोग करना चाहिए. कुटुम्बों का मिलन साल में 2-3 बार होना चाहिए जिससे समाज में परिवर्तन दिखेगा. मंच पर सरसंघचालक के साथ प्रांत संघचालक डॉ महेंद्र अग्रवाल और विभाग संघचालक शेषनाथ उपस्थित रहे.